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Two lines poetry

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Two lines poetry

वादे पे किसी के मैं एतबार नहीं करती
मैं इश्क़ तो करती हूँ इंतजार नहीं करती ।

नींदो से रिश्ता टूटे बुहत अरसा हो गया हैं
ख्वाबों से मेरी लेकिन बुहत बनती हैं आजकल ।

तन्हा जीना है तन्हा है मरना,
“यकीन है अब… तुम पर यकीन नहीं करना!!”

बेकरारी को मेरे करार ना मिल सका
उम्र इस तरह गुज़ार दी मैंने …।

वो आईना भी अब सवाल करता है …
कहाँ गया तुम्हारा हमसफ़र।।।

शाम तेरी याद में धुआं होती है….
मैंने वक़्त की ऐश ट्रे में कई अधूरे लम्हें बुझाए हैं …।।।

दर्द समझना किसी का आसान नहीं ,,
महसुस करना बुहत मुश्किल काम होता है।।।

इश्क़ विश्क़ सिर्फ़ किताबी बातें हैं,,
मैंने पढ़ा था कहीं।।।

‌by-
Bhavna R Verma

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